मेरी जवान भाभी बनी रंडी

मेरा नाम राज है और मैं 25 साल का हूँ. मैं मुंबई मे ही रहता हूँ और काफ़ी खुश नसीब भी हूँ. क्योकि मेरी लाइफ मे आज तक हमेशा अछा ही होता आया है और मैं इसी बात से बहुत खुश हूँ. मैं मुंबई मे अपने घर पर रहता हूँ और मैं एक कॉलेज से स्टडी भी कर रा हूँ.

मैं दिखने मे ठीक तक हूँ और ये भी न्ही की मैं दिखने मे गंदा हूँ बल्कि स्मार्ट ही हूँ क्योकि मुझ पर काफ़ी लड़कियाँ मारती भी है पर मैं ही हूँ जो भाव ख़ाता रहता हूँ.

आज मैं आप सबके लिए एक बहुत ही मस्त सी कहानी ले कर आया हूँ जो की मेरी ही कहानी है और एक दम सच्ची कहानी है. और मुझे उमीद है की आपको मेरी ये कहानी बहुत ही ज़्यादा पसंद भी आने वाली है. तो बिना कोई समय गवाए अब मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलता हूँ.

जेसा की आप जानते ही हो की मेरा घर फ्लॅट मे है और हमारे फ्लॅट के उपर वाले फ्लॅट मे 3 साल पहले ही एक फॅमिली रहने आई थी. उस फॅमिली मे एक हज़्बेंड वाइफ है, उनके 2 बच्चे है और भैया के मा बाप भी है.

वो फॅमिली बहुत ही अच्छी है और भैया जॉब के लिए सुबह ही 7 ब्जे निकल जाते है. मैने जब भाभी को पहली बार देखा था तो मैं उन्हे देखता ही रह गया था. ओह हो ये सब बताने लग गया उनका नाम बताना तो भूल ही गया. भाभी का नाम सुनीता है और वो दिखने मे बहुत ही खूबसूरत है. उनका फिगर तो कमाल का है और सच कहु तो उन्हे देख कर कोई ये न्ही कह सकता की उसके 2 बाच्चे है क्योकि वो तो अभी खुद ही अनमॅरीड लगती है.

तो दोस्तो ये तो मैने अब उनके बारे मे बता दिया पर अब मैं आपको अपनी आगे की स्टोरी पर ले कर चलता हूँ. मैने जब उसे पहली बार देखा तो मैं उसे बस देखता ही रह गया था. उसको देखते ही मेरी आँखों ने झपटना बंद कर्दिया था और बस उसे ही आँख टिकाए देखे जा रा था और बस देखे जा रा था.

मैं उससे फ्रेंडशिप करना चाहता था पर मैं हुमेशा यही सोचता था की पता न्ही ये फ्रेंडशिप करेगी भी या न्ही या कही भैया को बता कर मेरी पिटाई करवा देगी. पर खैर जो भी हो मेरा मन उन्हे देखने को करता रहता था और वो जब भी मार्केट जाती तो मैं उसे अंदर बैठे हुए ही घूर्ने लग जाता था. पर वो मेरे आँखो के आगे से ऐसे निकल कर जाती थी जेसे की उसने मुझे देखा ही न्ही था और जब भी वो बाहर जाती थी तो अपना सिर नीचे करके जाया करती थी.

मैं उसको चोदने के सपने लिया करता था और उसके नाम की मुठ भी मारा करता था. मुझे उसको देख कर काफ़ी तसल्ली मिल जाया करता था और मैं बस उसी के साथ ही खुश रहने की सोचता रहता था. मैं जान बूज कर दोस्तो के साथ बाहर खड़ा हो जाया करता और जब भाभी बाजार के लिए निकलती तो मैं उसे पीछे से देखता ही रहता था और उसकी हिलती हुई कमर को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था.

फिर ऐसे ही कुछ समय निकल गया और फिर एक दिन मैं अपने दोस्तो के साथ खड़ा था की तभी भाभी नीचे आई और हमारे पास से जाने लगी. पर मैने तभी कुछ ऐसा देखा जिसको देख कर मैं हेरान रह गया. तब मैने देखा की भाभी ने मेरे दोस्त को हल्की सी स्माइल पास करी और हमारे साथ निकल गयी.

ये देख कर पहले तो मुझे थोड़ा शक्क हुआ पर बाद मे ये भी खयाल आया की क्या पता जो मैने देखा हो वेसा कुछ भी ना हो. क्योकि तब मेरा दिल ये मानने को तैयार ही न्ही हो रा था की भाभी दोस्त पर लाइन मार सकती है.

इसलिए मैने ये सब सोचना बंद कर्दिया और अपनी लाइफ मे बिज़ी हो गया. फिर एक दिन अचानक मैने फिर से वैसा ही देखा तो मेरा जो शक्क था जिसको मैं अनदेखा कर रा था वो आज यकीन मे बदलता हुआ मुझे दिखाई देने लग गया था.

क्योकि आज हम फिर से बाहर खड़े थे और वही फिर से वो हमारे पास से गुज़री और तब उसने फिर से स्माइल पास करदी. तब मेरा ये शक्क यकीन मे बदल गया और तबसे मैं सब समझ गया की जो ये भाभी दिखती है असल मे ये ऐसी न्ही है.

तब मैने दोस्त को ताना मरते हुए कहा की क्या आइटम है यार. पर उसने मेरे आगे ऐसा दिखाया की मैं तो इससे जनता ही न्ही हूँ पर मैं सब जान गया था. इसलिए मैं भी चुप था और फिर एक दिन हम मार्केट मे गये और वहाँ पर हम दोनो एक साथ जा रहे थे की तभी उसके फोन पर एक फोन आया और वो बात करते हुए थोड़ा साइड मे निकल गया तो मुझे ये भी अजीब लगा. इसलिए मैने अब अंदर जाने का सोचा और वहाँ मैने देखा की सुनीता एक पीसी से फोन कर रही थी तो मैं अब पूरा शुवर हो गया.

अब मैने भी सोचा की अगर ये पराय मर्द के साथ फ्लर्ट कर सकती है तो मैं भी क्यो ना ट्राइ करलू. इसलिए मैने अब सुनीता का मोबाइल नंबर ढूँढने की कोशिश करी की तभी मेरे खयाल आया की दोस्त के फोन से ही नंबर को निकाला जा सकता है. और फिर मैने अपने दोस्त का फोन गाने लेने के बहाने से लिया और उसमे सुनीता का नंबर देखने लग गया की तभी मुझे वो मिल भी गया और फिर मैने अपने मोबाइल मे सेव करलिया और दोस्त का फोन वापिस लोटा दिया

फिर मैने अगले दिन उसे फोन किया पर साथ ही साथ दो बेल जाने पर फोन काट भी दिया क्योकि उस समय मेरे मन मे ये खयाल आ रहे थे की अगर उसके पति ने उठाया तो मैं क्या कहुगा और अगर उससी ने फोन उठाया तब भी मैं उससे क्या कहूँगा और फिर ऐसे ही सोचते हुए मैं कॉलेज पहुँच गया.

मैं वहाँ सारा समय यही सोचता रा और फिर तभी उसके तरफ से एक मिस्ड कॉल आई जिसको देख कर मैं पहले तो डर गया की पता न्ही अब ये किसने करी होगी. पर फिर भी मैने हिम्मत करते हुए कॉल बॅक करी तो सुनीता ही बोली.

उसकी पतली सी धीमी सी आवाज़ सुन कर मेरा लंड खड़ा हो गया. और तब उसने मुझसे पूछा की अपने फोन किया था.
मैं – न्ही तो आपकी मिस्ड कॉल आई थी.

सुनीता – न्ही जी पहले आपकी मिस्ड कॉल आई हुई थी.

मैं – न्ही जी मैं तो आपको जनता नही पहचानता न्ही तो कॉल केसे कर्दुन्गा.
मेरी ये बात सुन कर वो भी थोड़ी ठीक हुई बोली की शायद मेरे बच्चो ने ग़लती से आपका नंबर मिला दिया होगा.

मैं – बच्चे किसके बच्चे,!

सुनीता – मेरे और किसके बच्चे.

मैं – पर आपकी आवाज़ तो इतनी मीठी है की ऐसा लगता है की आप तो अभी कुवारि होगी.

सुनीता – अछा जी चलो कोई बात न्ही.

और फिर ऐसे ही हुमारी थोड़ी बात हुई तो उसने फोन कट करने को कहा क्योकि उसे और भी काम करने थे. तब फोन कट होने से पहले मैने उससे पूछा की मैं दुबारा कॉल कर सकता हूँ तो उसने मुझे माना न्ही किया पर उसने ये ज़रूर कह दिया की जब वो कॉल करे तभी बात हो सकती है.

मैं भी उसकी बात मान ली और फिर हमारी दिन भर फोन पर काफ़ी बाते होने लग गयी. हम काफ़ी अच्छे से मिक्स अप भी हो गये और तब मैने उसके घर का पूछा तो उसने मुझे बताया और फिर जब उसने मेरे बारे मे पूछा तो मैने भी उसे सब कुछ सच सच बता दिया.

पहले तो मुझे लगा की वो बात करना बंद कर्देगि पर ऐसा कुछ न्ही हुआ और फिर उसके बाद मैने उससे मिलने को कहा तो वो कहने लग गयी की मैं तुम्हे घर पर ही बूलौंगी जब मम्मी पापा चले जाएँगे. मैने भी उसकी बात मान ली और फिर ऐसे ही काफ़ी समय बीत गया और फिर एक दिन उसका फोन आया तो मैं उसके घर चला गया.

उसके घर मे एंटर होते ही मैं उसको देखता ही रह गया क्योकि वो बहुत खूबसूरत लग रही थी और फिर मैने बिना कोई देर किए उसे गोद मे उठा कर उसके कमरे मे ले गया और उसके जिस्म को छेड़ने लग गया. फिर मैने धीरे धीरे कर उसे नंगा कर दिया और उसके बूब्स को हाथो मे ले कर दबाने लग गया और फिर मूह मे भर कर चूसने भी लग गया.सुनीता के मूह से सिसकारिया निकल रही थी और मैं भी नंगा हो गया था और फिर मैने उसकी चूत पर हाथ रखा और उसे बाहो मे भर लिया.